बात वादो की सियासत की,खबर कांग्रेस के अंदरूनी खेमे में हलचल तेज, लेकिन जुबान पर सभी के ताला है सचिन पायलट पर प्रतिक्रिया देने से प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी बचते नजर आए ।

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एक तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 53 दिन बाद राजस्थान को अल्लो किया है इसके साथ ही अब पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट बी अनलॉक होते नजर आ रहे हैं राजस्थान अनलॉक के साथ ही सचिन पायलट के एक अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को दिए विस्फोटक इंटरव्यू ने कई कांग्रेस नेताओं की मुंह पर ताला जड़ दिया है को माध्यम से एक ऐसा विस्फोट किया है जो अब कांग्रेस को लॉक करने की तैयारी में है

इस इंटरव्यू के माध्यम से पायलट ने कांग्रेस आलाकमान सहित सभी विरोधियों को चेताया है कि जो 1 साल पहले वादे करके अस्थिर गहलोत सरकार गांधी परिवार के हस्तक्षेप के बाद स्थिर हुई थी सुलेख की राह दिखाने वाले गांधी परिवार ने एक कमेटी बनाकर सचिन पायलट की मांगों पर विचार कर कार्यकर्ताओं को पूर्ण सम्मान दिलाने का वादा किया था ।

53 दिन बाद 8 जून से राजस्थान अल्लो की ओर बढ़ रहा है अब प्रदेश में सोमवार सुबह 5:00 बजे से शुक्रवार शाम 5:00 बजे तक अनलॉक रहेगा जिसमें सुबह 5:00 बजे से शाम को 5:00 बजे तक सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति सरकार ने दी है वही शुक्रवार शाम 5:00 बजे से सोमवार सुबह 5:00 बजे तक 48 घंटे का संपूर्ण लोग डाउन रहेगा वहीं दूसरी ओर आज हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित सचिन पायलट का इंटरव्यू जिसमें पायलट कहा कि दस माह पहले जिस कमेटी का गठन किया था, वह अपने उद्देश्य में विफल रही है। जो वायदे किए गए थे, उन्हें अभी तक भी पूरा नहीं किया गया है। पायलट ने कहा कि कमेटी के वरिष्ठ सदस्य केसी वेणुगोपाल राजस्थान से राज्यसभा के सांसद हैं। लेकिन वे छह माह से राजस्थान नहीं आए हैं। कमेटी भी छह माह से निष्क्रिय है।

राजस्थान प्रभारी कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को भी इस इंटरव्यू में आड़ हाथों लिया है पायलट का कहना है कि प्रभारी जयपुर आकर राजनीतिक नियुक्तियों की तारीख तो बताते हैं लेकिन लेकिन यह तारीख किस सन की होगी यह खुद उन्हें भी पता नहीं होता । सरकार का आधा कार्यकाल पूरा होने के बावजूद भी अब तक जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए अपना सब कुछ समर्पित किया उन्हें सम्मान नहीं मिला है। कार्यकर्ताओं को सम्मान न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।

इससे पहले भी सचिन पायलट कई मौकों पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। लेकिन इस बार पायलट कुछ ज्यादा ही मुखर नजर आ रहे है। अब देखना है कि इंग्लिश बाबू की इस अंग्रेजी इंटरव्यू का गांधी परिवार पर कितना असर होता है। हालांकि पायलट ने बगैर किसी का नाम लिए आलाकमान के पैसे तक को आईना दिखाने का प्रयास किया है सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने जो समन्वय समिति बनाई थी, उसने अभी तक कोई भी निर्णय नहीं लिया है। इसके साथ ही पायलट ने प्रदेश सरकार के कामकाज पर की सवाल खड़ा किया है।

गत वर्ष अगस्त माह में पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के 18 विधायक दिल्ली में एक माह तक होटल में लॉक रहे थे। बाद में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात कर कांग्रेस के विधायक वापस जयपुर आए गए, गहलोत सरकार स्थिर हो गई लेकिन अभी तक भी सचिन पायलट के समर्थकों को सरकार में महत्व नहीं मिला है। दिल्ली जाने के कारण पायलट सहित सभी तीन मंत्रियों को बर्खास्त किया गया जिससे प्रदेश का ग्रामीण विकास,पर्यटन ओर खाद्य व8भाग से विकास कार्यो को तिलांजलि ऐसी लगी कि उनके स्थान पर ना तो नए मंत्री आये और ना ही इन मंत्रालयों से जुड़े विकास को राह मिल पाई। पायलट भले ही अपने कार्यकर्ताओं को लेकर आक्रोशित हो कि उनको ना पद मिला ना सम्मान लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आपने निकटतम और समर्थक को महत्वपूर्ण पदों पर आसीन कर पूरा सम्मान दिया ।

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