रक्षाबंधन पर बहन भाई से मांगती है देश सेवा का वचन_जालसू

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    नागौर जिले का एक ऐसा गाँव जिसे फौजियों वाला गांव जालसू के नाम से जाना जाता है,

    अशोक गुर्जर ,डेगाना

    राजस्थान के नागौर का एक गाँव जिसपर गर्व है देश को ,और हो भी क्यों नहीं 300 घरो की बस्ती वाले इस गाँव के हर घर में है हमारे रक्षक…. जिनकी बदोलत हम और हमारे देश की सीमाए है सुरक्षित ……यह गाँव है डेगाना उपखंड का जालसू गाँव ……  

     

    जालसू गाँव का नाम आते ही नागौर ही क्या पुरे राजस्थान का सर गर्व से उचा हो जाता है

    नागौर जिले के डेगाना उपखंड का जालसू एक ऐसा गाँव है , जहा का हर युवा आजादी से लेकर अब तक देश सेवा को ही अपना लक्ष्य मानकर भारतीय सेना में प्रवेश का सपना देखता है ….और सेना की नोकरी को सबसे बड़ा सम्मान भी …..

    इस गाँव के हर घर से एक युवा राष्ट्र सेवा को समर्पित है वर्तमान में 180 से ज्यादा लोग देश सेवा में जुटे हुए है वही करीब 200 से ज्यादा भूतपूर्व सेनिक है….जो आज भी हर परिस्तिथि में सदेव देश के लिए दुश्मनों से लोहा लेने को तैयार रहते है ……

    देश के प्रति इस गाँव के लोगो का ज़ज्बा देख कर हमारी सरकारे भी इनके सम्मान में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है …………आज से करीब40 साल पहले जब आस पास के कस्बो में रेलवे स्टेशन बनना मुश्किल ही नहीं अपितु नामुमकिन से लगता था…लेकिन इस गाँव का देश सेवा के प्रति समर्पण को देखकर जालसू में रेलवे स्टेशन स्थापित किया गया ताकि हमारे सेनिको को आने जाने में किसी तरह की दिक्कतों का सामना ना करना पड़े ……इस रेलवे स्टेशन का सञ्चालन का जिम्मा भी ग्रामीणों के पास ही है…..ग्रामीण ही सुनिश्चित करते है की जालसू स्टेशन से कही की भी यात्रा के लिए निकलने से पहले ट्रेन में टिकिट लेकर ही यात्रा करे ……ग्रामीणों की इसी सोच को देखते हुए भारतीय रेल प्रबंधन ने आज तक इस स्टेशन का जिम्मा ग्रामीणों पर ही छोड़ रखा है …..
    …गाँव में कोई ट्रेक नहीं है और न ही कोई बड़े खेल मैदान लेकिन जालसू गाँव में सुबह और शाम युवाओ को खेतो की मेड पर दौड़ लगते हुए देखा जा सकता है, इनका देश सेवा के प्रति जनून देखा कर आप भी गोरवान्वित महसूस करेंगे …..

    सेना वाले इस गाँव में हर साल रक्षाबंधन पर बहन भाई से मांगती है देश सेवा का वचन,

    जालसू गाँव की हर बहन का एक ही सपना रहता है की उसका भाई देश सेवा के लिए फोज में भर्ती हो और देश की सेवा करे …इसी सोच के चलते यहाँ की हर बहन रक्षाबंधन पर अपने भाइयो की कलाई पर पेम का धागा यानि राखी बाँधकर देश सेवा का वचन मांगती है….. ओर यह गांव में परिपाटी बनी हुई है जिसे लगातार निभाया जा रहा है भाई भी अपनी बहन को दिए इस वचनों कोनिभाने के लिए पूरा संघर्ष कर देश सेवा के लिए फोज में भर्ती हो कर अपनी बहन को दिए वचन को पूरा करते है …..

    गांव में ऐसे परिवार भी जिनकी चार पीढ़ियां सेना में,

    सावंत सिंह इनके बेटे नाथू सिंह , नाथू सिंह के बेटे नवल किशोर ,नवल के बेटे सुरेंद्र सिंह सेना में रहकर देश सेवा की, इसके साथ ही चतर सिंह, उगम सिंह ,मदन सिंह, मेजर रविंद्र सिंह , शिव लाल सिंह की भी चार पीढ़ियां

    शिवलाल सिंह ,जोर सिंह ,जय सिंह, गौरव सिंह ,खेतसिंह,की चार पीढ़ियां सेना में सेवाए दे रही है ,द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी इस गाँव के २० सैनिको ने यह युद्ध लड़ा था, इस दौरान जालम सिंह दुश्मनों से लोहा लेते वीरगति को प्राप्त हो गए थे ….

    शहादत के किस्सो से युवा हो रहे है प्रेरित ……..
    आज भी गांव में शहीद जालम सिंह का नाम हर व्यक्ति की जुबान पर होता है उनकी बहादुरी के किस्से बड़े बुजुर्ग गाँव के युवाओं को सुनाकर उनमें जोश का संचार करते हैं वही आज भी गांव के युवाओं का पहला लक्ष्य सेना में जाकर देश सेवा करना होता है 

     

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