जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक हर घर नल कनैक्शन के गुणवत्ता पर जोर…

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जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठकहर घर नल कनैक्शन के कायोर्ं में गति के साथ गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान दें-अतिरिक्त मुख्य सचिव
जयपुर, 09 जून। जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) श्री सुधांश पंत ने अधिकारियों को प्रदेश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत हर घर नल कनैक्शन के कायोर्ं में गति के साथ गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कायोर्ं में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों से सतत मॉनिटरिंग और थर्ड पार्टी इंस्पैक्शन सहित ऎसे सभी तरीके अपनाए जाए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जनता को लम्बी अवधि तक बिना किसी व्यवधान के पेयजल आपूर्ति का लाभ मिल सके।  


बुधवार को शासन सचिवालय में जल जीवन मिशन की राज्य स्तरीय क्रियान्वयन टीम के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कायोर्ं की स्वीकृतियां समय पर जारी करने से लेकर लोगों को हर घर नल कनैक्शन का वास्तविक लाभ देने तक सभी निर्धारित नॉर्म्स की पालना की जाए। सभी प्रक्रियाओं में पूरी सावधानी रखें ताकि कहीं किसी तकनीकी खामी की वजह से स्वीकृतियों में अनावश्यक विलंब नहीं हो।


लक्ष्यों पर पूरा फोकस
एसीएस ने कहा कि प्रदेश के गांवों में हर घर नल कनैक्शन और सभी घरों में नल कनैक्शन वाले गांवों की संख्या में लक्ष्य के अनुरूप बढ़ोतरी राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसको प्राप्त करने के लिए राज्य स्तरीय क्रियान्वयन टीम के अधिकारी अपने स्तर पर उचित रणनीति को अपनाते हुए फील्ड में कार्यरत अधिकारियों की प्रगति की मॉनिटरिंग करें। राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति (एसएलएसएससी) की बैठकों में जारी स्वीकृतियों की तुलना में तकनीकी स्वीकृतियां और निविदाओं के बकाया कार्य को पूरा कर सभी कार्यादेश शीघ्रता से जारी करे, जिससे हर घर नल कनैक्शन के कायोर्ं में गति आए।


वाटर रिजर्वेशन पर लिया फीडबैक
श्री पंत ने बैठक में अधिकारियों के साथ स्वीकृत परियोजनाओं के लिए जल स्रोत की उपलब्धता के बारे में भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं के लिए स्थाई स्रोत उपलब्ध नहीं है, वहां जेजेएम की गाइडलाइन के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था के सम्बंध में आवश्यक कार्यवाही करें। उन्होंने पेयजल परियोजनाओं के लिए वाटर रिजर्वेशन के बारे में गत दिनों जल संसाधन विभाग के साथ आयोजित समन्वय बैठक में दिए गए निर्देशों के बारे में सम्बंधित जिलों में प्रोजेक्ट विंग के अधिकारियों द्वारा की गई कार्यवाही के बारे में भी फीडबैक लिया। इस सम्बंध में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की अगली साझा बैठक जल्द ही आयोजित होगी।
13 जिलों में लगभग सभी तकनीकी स्वीकृतियां जारी


बैठक में बताया गया कि प्रदेश में राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति (एसएलएसएससी) की बैठकों में पूर्व में 9101 गांवों के लिए मंजूर पेयजल योजनाओं की तुलना में अब तक 7096 गांवों की तकनीकी स्वीकृतियां (करीब 80 प्रतिशत) तथा 5184 (लगभग 57 प्रतिशत) गांवों की निविदाएं जारी की गई है। जयपुर, चूरू, बूंदी, बारां, दौसा, झुंझुनू, बांसवाड़ा, टोंक, धौलपुर, सीकर, अलवर, भीलवाड़ा एवं भरतपुर में लगभग सभी तथा उदयपुर में 95 प्रतिशत व राजसमंद में 92 प्रतिशत तकनीकी स्वीकृतियां जारी कर दी गई है। वहीं कम प्रगति वाले जिलों में जैसलमेर में 72 प्रतिशत, जालौर में 68 प्रतिशत, अजमेर में 65 प्रतिशत और श्रीगंगानगर, पाली एवं करौली में 43-44 प्रतिशत तकनीकी स्वीकृतियों का कार्य शेष है। इसी प्रकार मेजर प्रोजेक्ट्स के तहत स्वीकृत परियोजनाओं में अब तक 2666 गांवों की तकनीकी स्वीकृतियां और 1500 गांवों की निविदाएं जारी की गई है।


इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा
बैठक में एसीएस राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (एसपीएमयू), जिला स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स (डीपीएमयू) एवं आईएसए (क्रियान्वयन सहायता एजेंसीज) की सक्रियता के बारे में अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही विलेज एक्शन प्लान, ग्राम स्तरीय जल एवं स्वच्छता समिति एवं जिला स्तरीय जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित बैठकों तथा आगामी माह से प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन की रूपरेखा तैयार करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में विशिष्ट शासन सचिव श्रीमती उर्मिला राजोरिया, उप शासन सचिव-प्रथम राजेन्द्र शेखर मक्कड़, मुख्य अभियंता (ग्रामीण) आरके मीना, मुख्य अभियंता (गुणवत्ता नियंत्रण) आरसी मिश्रा, मुख्य अभियंता (विशेष प्रोजेक्ट्स) दलीप कुमार गौड़, मुख्य अभियंता (तकनीकी) संदीप शर्मा, वित्तीय सलाहकार सुश्री कोमल आगरी, डब्ल्यूएसएसओ के निदेशक मनीष बेनीवाल और चीफ कैमिस्ट राकेश माथुर मौजूद रहे।

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