राजस्थान में एक गाँव ऐसा भी है !

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    पीपलान्त्री गाँव अब नाम का मोहताज नहीं है ,बेटी और कुदरत दोनों इस गाँव के लोगो की इज्जत है,इसके पीछे भी एक कहानी है,जिसकी बदोलत आज पीपलान्त्री का नाम देश दुनिया जाना जाता है,कहानी बहुत ही पप्रेरणादायक है इस कहानी को देखा सुन कर आपको दशरथ मांझी की कहानी भी याद जरुर आएगी,मार्बल खदानों से घिरा यह गाँव धीरे धीरे अपनी वास्तविक पहचान खोने लगा था,इस गाँव में पानी और हरियाली का नामोनिशान मिट चूका था लेकिन आज देश की पंचायते पिपलान्त्री को ग्रामीण विकास में आदर्श मानती है ,

    अंतरराष्ट्रीय मंचो पर सुनी जाती है पिपलान्त्री की कहानिया..

    सात हजार की आबादी वाला गाँव पिपलान्त्री की कहानिया आज अंतरराष्ट्रीय मंचो पर गर्व से सुनी जाती है,इस गाँव की एकता की मिशाल का अंदाजा इसी से लगा सकते है की आज इस गाँव के हर हाथ में कम है और हर परिवार की बीती के नाम पर एफडी ,पिपलान्त्री ने दुनिया को दिखा दिया की सरकारी योजनाओ को किस प्रकार से क्रियान्वित कर सफलता की कहानी लिखी जा सकती है ,पिपलान्त्री निर्मल गाँव,आदर्श गाँवऔर अब पर्यटन के लिए जाना जाता है,

    2005 के पंचायत चुनाव के बाद बदली गाँव की तक़दीर..

    इस गाँव की कामयाबी की कहानी 2005 में शुरू हुई थी, उस साल पंचायतो के चुनाव थे और इन चुनावो में गाँव के ही उर्जावान श्यामसुंदर पालीवाल को ग्रामीणों ने सरपंच के टूर पर चुना,उस दौर में अधिकांश ग्रामीण पानी और बेरोजगारी परेशां हो कर गाँव से पलायन कर चुके थे,पहाडियों के बिच फसे पिपलान्त्री में सिचाई के साधन नहीं होने और खदानों से निकलने वाले अपशिष्ट से उपजाऊ जमीं बंजर हुए जा रही थी,गाँव में चारो और समस्याओ का अम्बर था ,

    नवनिर्वाचित सरपंच के प्रयास लाये रंग

    सरपंच श्याम सुन्दर पालीवाल ने इन सभी समस्याओ से लड़ने का बीड़ा उठाया ग्रामीणों को एकत्रित कर गाँव के विकास में भागीदार बन्ने का संकल्प दिलवाया,सबसे पहले गाँव में पानी की समस्या को दूर करने का संकल्प लिया ,बेरोजगार नोजवानो को साथ लेकर गाँव में जगह जगह बरसाती पानी को रोकने के लिए एनिकट का निर्माण शुरू किया,लगभग एक दर्जन एनिकटो को निर्माण करवाया,इसके बाद नंगे पहाड़ो पर पौध रोपण का का शुरू किया इस काम में गाँव की महिलाओ की भी अहम् भागीदारी रही,पूरा गाँव जूटा तो देखते ही देखते गाँव की तस्वीर बदलना शुरू हो गई ,

    गाँव से रुका प्लायन …

    इस बदलती तस्वीर को देख गाँव से प्लायन कर चुके युवा भी वापस गाँव की और लौटने लगे ,बरसात का पानी एनिकटो में एकत्रित हुआ तो गाँव में जलस्तर भी एकाएक बढ गया,नगे पहाड़ो पर हरियाली छाने लगी ,गाँव अब खुशहाल है ,देश विदेश से पर्यटक इगंव के विकास को देखने आते है !

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