अक्टूबर माह में बदलेगी 4 ग्रहों की चाल…

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अक्टूबर माह में बदलेगी 4 ग्रहों की चाल
अक्टूबर में 4 बड़े ग्रहों का होगा राशि परिवर्तन

ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की विशेष भूमिका होती है। ग्रहों की चाल और उनके गुण व्यक्ति के स्वभाव व भविष्य पर खासा असर डालते हैं। ग्रह एक निश्चित अंतराल पर अपनी चाल को बदलते रहते हैं। यह एक विशेष अवधि में मौजूदा राशि को छोड़कर दूसरी राशि में जाते रहते हैं। जब-जब ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है तब तब इसका व्यापक असर सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ता है। हर महीने कई ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर – जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया किअक्तूबर के महीने में चार ग्रह अपनी राशि बदलेंगे जिसमें बुध, शुक्र, मंगल और सूर्य ग्रह होंगे। महीने के शुरुआती दिनों में ही शुक्र और बुध ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा। इसके बाद 17 अक्टूबर को सूर्य और फिर मंगल का राशि परिवर्तन होगा। अक्टूबर के महीने में चार ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे जिससे आम जनमानस के साथ.साथ अर्थव्यवस्था और वातावरण पर भी प्रभाव देखने को मिलेगा। अक्टूबर में ग्रहों के राजा सूर्य अपनी नीच राशि तुला में गोचर करेंगे शुक्र ग्रह का गोचर कन्या राशि में होगा वहीं मंगल मीन राशि में उल्टी चाल चलेंगे। बुध ग्रह कन्या राशि में वक्री गति करते हुए तुला राशि में गोचर करेंगे और 14 अक्टूबर से 4 नवंबर तक तुला राशि में वक्री गति करेंगे। सूर्य का अपनी नीच राशि तुला में गोचर करना कई महत्वपूर्ण बदलावों का कारण साबित हो सकता है।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया किग्रहों की दशा के हिसाब से अक्टूबर का महीना काफी अहम रहने वाला है। इस महीने कई ग्रह अपनी स्थिति बदल रहे हैं और दीपावली के समय पर तुला राशि में एक साथ 4 ग्रहों के रहने से बेहद शुभ योग बन रहा है। इसके अलावा सभी चार ग्रहों के राशि बदलने से अलग-अलग राशि के लोगों को शुभ परिणाम मिलेंगे। हालांकि 6 राशि के लोगों पर जमकर कृपा बरसेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्टूबर में मंगल और बुध अपनी चाल बदलकर वक्री हो जाएंगे, जबकि सूर्य और शुक्र ग्रह राशि परिवर्तन करने वाले हैं। मंगल अभी मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और 4 अक्टूबर को इसी राशि में वक्री हो जाएंगे। वहीं बुध भी अभी तुला राशि में गोचर कर रहे हैं और 14 अक्टूबर को इसी राशि में वक्री हो जाएंगे। 4 नवंबर तक बुध ग्रह की वक्री चाल जारी रहेगी। जबकि सूर्य 17 अक्टूबर को कन्या राशि से तुला राशि में गोचर करेंगे और शुक्र 23 अक्टूबर को राशि बदलकर सिंह राशि से कन्या में जाएंगे। ग्रहों की स्थिति में हो रहे इन बदलावों से 6 राशियों पर शुभ प्रभाव होगा और इन राशियों के लोगों की किस्मत खुल सकती है।

शुक्र ग्रह का राशि परिवर्तन
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सुख, समृद्धि और वैभव प्रदान करने वाला ग्रह माना गया है। शुक्र का राशि परिवर्तन वृश्चिक राशि में 2 अक्टूबर 2021 को सुबह 9.35 बजे होगा और 30 अक्टूबर को 15.56 बजे तक शुक्र इसी राशि में रहेंगे। शुक्र ग्रह का प्रभाव इनकम, खर्चा, शारीरिक सुख-सुविधाएं, शौक और भोग-विलास पर होता है। इस ग्रह के कारण विवाह, पत्नी, अपोजिट जेंडर और यौन सुख संबंधी मामलों में शुभ-अशुभ बदलाव देखने को मिलते हैं। शरीर में शुक्र का प्रभाव प्राइवेट पार्ट्स पर पड़ता है। इसके अशुभ प्रभाव से खांसी और कमर के निचले हिस्सों में बीमारी होती है।

वक्री बुध का कन्या राशि में गोचर
कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि बुध ग्रह को तटस्थ ग्रह माना गया है। इसके अलावा बुध ग्रह वाणी,संचार और व्यापार के कारक ग्रह माने गये हैं। वक्री बुध 2 अक्टूबर 2021 को कन्या राशि में सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा और उसके बाद 18 अक्टूबर 2021 को कन्या राशि में मार्गी हो जाएंगे। इसके बाद 2 नवंबर 2021 सुबह 9 बजकर 43 मिनट के बाद तुला राशि में गोचर करेंगे। बुध ग्रह के शुभ प्रभाव से शिक्षा, गणित, लेन-देन, निवेश और बिजनेस में फायदा मिलता है। इसके प्रभाव से फायदेमंद योजनाएं बनती हैं। इसके साथ ही शरीर में बुध का असर स्किन और आवाज पर पड़ता है। बुध के शुभ प्रभाव से इंसान चतुर बनता है। बुध के अशुभ प्रभाव से इन्हीं मामलों में नुकसान होता है।

सूर्य का तुला राशि में प्रवेश
भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। कुंडली में सूर्य ग्रह के मजबूत होने पर व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान और यश में बढ़ोतरी होती है।तुला राशि में सूर्य का गोचर 17 अक्टूबर 2021 को दोपहर एक बजे होगा और यह ग्रह इस राशि मे 16 नवंबर 2021 को दोपहर 12.49 बजे तक रहेगा और उसके बाद वृश्चिक राशि में प्रवेश कर जाएगा। सूर्य ग्रह का असर शरीर में पेट, आंखें, दिल, चेहरे और हड्डियों पर होता है। सूर्य के अशुभ प्रभाव से सिरदर्द, बुखार और दिल की बीमारियां होती हैं। इसके शुभ प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है। सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। इस ग्रह के प्रभाव से जॉब और बिजनेस में तरक्की भी मिलती है।

मंगल का राशि परिवर्तन
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष में मंगल ग्रह को उग्र माना गया है। मंगल ग्रह साहस और पराक्रम के कारक होते हैं। जिन जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह का प्रभाव होता है वे बहुत ही आत्मविश्वास वाले व्यक्ति होते हैं। मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी होते हैं। तुला राशि में मंगल का गोचर 22 अक्टूबर 2021 को सुबह 1.13 बजे होगा। जहां पर ये 5 दिसंबर 2021 तक सुबह 5.01 बजे तक रहेंगे, इसके बाद मंगल वृश्चिक राशि में गोचर कर जाएंगे। मंगल का असर शारीरिक ऊर्जा, ब्लड प्रेशर, स्वभाव में उत्साह, वीरता और गुस्सा, प्रॉपर्टी, व्हीकल, भाई, दोस्त, धातुओं में तांबे और सोने पर होता है। अगर मंगल का शुभ प्रभाव हो तो इन मामलों से जुड़ी परेशानियां होती है। वहीं शुभ प्रभाव से फायदा मिलता है।

ग्रहों के गोचर का प्रभाव
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि ग्रहों की जो स्थिति बनने जा रही है वह बड़े परिवर्तनों की ओर इशारा कर रही है। शुक्र बुध और सूर्य के राशि परिवर्तन से व्यापार में तेजी आएगी। देश में कई जगह प्राकृतिक घटनाएं होगी। भूकंप आने की संभावना है। तूफान, बाढ़, भूस्खलन, पहाड़ टूटने, सड़के और पुल भी टूटने की घटनाएं हो सकती हैं। यातायात से जुड़ी बड़ी दुर्घटना होने की भी आशंका है। बीमारियों का संक्रमण बढ़ सकता है। शासन-प्रशासन और राजनैतिक दलों में तेज संघर्ष होंगे। दुर्घटना और भूकंप से जन-धन हानि होने की आशंका बन रही है। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। राजनीति में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखने को मिलेगा।

क्या करें उपाय
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हं हनुमते नमः, ऊॅ नमः शिवाय, हं पवननंदनाय स्वाहा का जाप करें। प्रतिदिन सुबह और शाम हनुमान जी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं। हनुमान चालीसा और संकट मोचन का पाठ करें। लाल मसूर की दाल शाम 7:00 बजे के बाद हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। हनुमान जी को पान का भोग और दो बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। ईश्वर की आराधना संपूर्ण दोषों को नष्ट एवं दूर करती है। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए। माता दुर्गा, भगवान शिव और हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए।

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